Home गैजेट्ससाहब जिंदा हूं, कहिए तो मरकर दिखाऊं कागजों में मृत घोषित किसान पहुंचा कलेक्ट्रेट, कलेक्टर बोल दादा के नाम पर कराया था पंजीयन

साहब जिंदा हूं, कहिए तो मरकर दिखाऊं कागजों में मृत घोषित किसान पहुंचा कलेक्ट्रेट, कलेक्टर बोल दादा के नाम पर कराया था पंजीयन

by INSIDE STORY TODAY
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कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में आज को कलेक्ट्रेट कार्यालय उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब एक किसान ने खुद के जीवित होने का सबूत देने के लिए कलेक्टर के पास पहुंचा। रीठी तहसील के ग्राम गुरजीकला निवासी किसान रामभरण विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है, जिसके कारण वह अपनी धान की फसल नहीं बेच पा रहे हैं।
​किसान रामभरण विश्वकर्मा सोमवार को कलेक्टर आशीष तिवारी के पास अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। किसान का दावा था कि उन्हें समर्थन मूल्य पर 250 क्विंटल धान बेचनी है, जिसके लिए उन्होंने बाकायदा पंजीयन कराया था। लेकिन, ग्राम पंचायत के रोजगार सचिव की कथित लापरवाही के कारण उनकी समग्र ईडी में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।
​पंजीयन पोर्टल पर खुद को मृत देखकर हताश किसान ने कलेक्टर के सामने भावुक होते हुए कहा— साहब, मैं जीवित हूं। कहिए तो मरकर दिखाऊं किसान के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया।
​कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर आशीष तिवारी ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पूरे मामले की बारीकी से जांच करने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

​मामले की शुरुआती जांच के बाद कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने किसान के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। जांच में पाया गया कि किसान रामभरण विश्वकर्मा ने जो धान का पंजीयन कराया था, वह उनके नाम पर नहीं बल्कि उनके दादा रामनाथ बढ़ई के नाम पर था।
​रिकॉर्ड के अनुसार रामनाथ बढ़ई की वास्तव में मृत्यु हो चुकी है। चूंकि पंजीयन मृतक के नाम पर था, इसलिए उसे स्वीकार नहीं किया गया। रामभरण विश्वकर्मा को व्यक्तिगत रूप से मृत घोषित नहीं किया गया है, बल्कि उन्होंने अपने अपनी गलती के कारण अपने दादा जी के नाम पर पंजीयन कराया था

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