नागपंचमी पर बाबा भिलट देव मंदिर में उमड़ा सैलाब सौ साल पुराने मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

सौ साल पुराने मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

Aug 17, 2026 - 19:33
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नागपंचमी पर बाबा भिलट देव मंदिर में उमड़ा सैलाब सौ साल पुराने मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

बड़वानी। नागपंचमी के अवसर पर बड़वानी शहर की सीमा खत्म होते ही धार जिले की सीमा से करीब तीन किलोमीटर पहले नवलपुरा रोड पर स्थित करीब सौ वर्ष पुराना बाबा भिलट देव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। सोमवार सुबह से ही मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। तड़के करीब पांच बजे से ही बाबा भिलट देव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ भीड़ लगातार बढ़ती गई। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।मंदिर से जुड़ी एक खास और वर्षों पुरानी मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय है। मंदिर के भक्त शोभाराम कुशवाह के अनुसार, करीब सौ वर्ष पहले यह पूरा क्षेत्र घने जंगल से घिरा हुआ था, जहां उनके पूर्वज खेती करते थे। मान्यता के अनुसार, एक रात बाबा भिलट देव उनके परदादा के सपने में आए और उन्हें गांव से बाहर ले जाने का निर्देश दिया। इसके बाद बाबा भिलट देव की प्रतिमा को बैलगाड़ी में रखकर दूसरे स्थान पर ले जाने का प्रयास किया गया। परिवार के लोग प्रतिमा को लेकर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन जैसे ही बैलगाड़ी आज के मंदिर वाले स्थान पर पहुंची, उसके पहिए अचानक थम गए। परिवार ने बैलगाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वह टस से मस नहीं हुई। परिवार ने इसे बाबा भिलट देव की इच्छा और संकेत माना। इसके बाद उसी स्थान को बाबा का पवित्र स्थान मानकर वहां प्रतिमा स्थापित कर दी गई। धीरे-धीरे इस स्थान के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और आगे चलकर यहां भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। आज यह मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मंदिर के गर्भगृह में आज भी मिट्टी से बनी बाबा भिलट देव की मुख्य प्रतिमा विराजमान है। मुख्य प्रतिमा के साथ चार छोटी प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं।