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खंडवा में गंदे पानी की सप्लाई: कांग्रेस ने मटके के साथ किया विरोध – Khandwa News

Khandwa News खंडवा में नगर निगम द्वारा गंदे पानी की सप्लाई पर हंगामा। कांग्रेस ने मटका लेकर अनोखा विरोध किया, जिसमें शहर अध्यक्ष ने खुद गंदा पानी पीकर अपना विरोध दर्ज कराया। जानें क्यों हुआ यह प्रदर्शन और क्या है नगर निगम का जवाब।

On: 30/08/25 2:38 PM
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Khandwa News क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर में नल से आने वाला पानी, जो जीवन का सबसे ज़रूरी हिस्सा है, अगर गंदा और बदबूदार हो तो क्या होगा? मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में ठीक यही हुआ, और इसका नतीजा एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक हंगामा बन गया। नगर निगम द्वारा शहरवासियों को गंदे पानी की सप्लाई करने के विरोध में कांग्रेस ने अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, जो न केवल सुर्खियां बटोरी बल्कि पानी की गुणवत्ता जैसे गंभीर मुद्दे पर सवाल भी खड़े किए।

पुंगी बजाकर, मटका लेकर, क्यों हुआ यह विरोध?

विरोध प्रदर्शन का यह तरीका बिलकुल हटकर था। कांग्रेस कार्यकर्ता पुंगी बजाते हुए नगर निगम कार्यालय तक पहुंचे, मानो किसी बड़े उत्सव का हिस्सा हों। लेकिन यह उत्सव नहीं, बल्कि शहर की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था और गंदे पानी की आपूर्ति के खिलाफ एक तीखा व्यंग्य था। सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाला पल तब आया जब शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने एक मटके में गंदा पानी लेकर आईं। उन्होंने यह पानी सीधे नगर निगम के उपायुक्त को पीने के लिए कहा, जो उन्होंने मना कर दिया।

इस घटना ने एक गहरा संदेश दिया: जिस पानी को अधिकारी खुद नहीं पी सकते, उसे शहर के लोग कैसे पी सकते हैं? जब उपायुक्त ने मना किया, तो प्रतिभा रघुवंशी ने खुद वह गंदा और मठ-मैला पानी पीकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह दृश्य न केवल नाटकीय था बल्कि इसने आम जनता की पीड़ा को भी सामने ला दिया। इस दौरान, नगर निगम के आयुक्त के न मिलने पर कांग्रेस ने उन्हें ढूंढने वाले को 2100 रुपए का इनाम घोषित किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वे इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रहे थे।


नगर निगम का पक्ष: ‘नई पाइपलाइन की सफाई’

इस विरोध पर नगर निगम का क्या कहना था? निगम के अधिकारियों ने आरोपों को सीधे तौर पर नहीं नकारा, लेकिन इसके पीछे का कारण बताया। डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यह समस्या अमृत 2 योजना के तहत नई पाइपलाइन बिछाए जाने और उसकी सफाई से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि नई पाइपलाइन की सफाई के दौरान ही यह गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुँच गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अब स्थिति सामान्य हो गई है और दोपहर के बाद से साफ पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है।

लेकिन क्या यह सफाई का मामला इतना बड़ा था कि इतने सारे लोग प्रभावित हुए? सवाल उठता है कि क्या नई पाइपलाइन की सफाई के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकती थी ताकि लोगों को गंदा पानी पीने के लिए मजबूर न होना पड़े?


स्वास्थ्य से खिलवाड़: त्योहारों के मौसम में बड़ा खतरा

कांग्रेस का आरोप था कि नगर निगम त्योहारों के मौसम में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। यह आरोप बिलकुल सही है। गंदे पानी से हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल सकती हैं। विशेष रूप से त्योहारों के दौरान, जब लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां मनाते हैं, तब इस तरह की लापरवाही एक बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है।

खंडवा में 2009 से ही नर्मदा जल परियोजना के तहत 50 किलोमीटर दूर से पानी लाया जा रहा है। बार-बार पाइपलाइन के फूटने की समस्या भी एक गंभीर मुद्दा है, जिसके चलते अमृत 2 के तहत नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये नई पाइपलाइनें टिकाऊ होंगी और क्या भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोका जा सकेगा?

समाधान की ओर एक कदम

यह घटना केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह शहर की बुनियादी ज़रूरतों और शासन की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा की शुरुआत है। यह ज़रूरी है कि नगर निगम अपनी योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लागू करे और जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखे। शहरवासियों को भी जागरूक रहना होगा और अपनी समस्याओं को खुलकर सामने लाना होगा।

खंडवा में हुआ यह हंगामा एक सबक है कि पानी जैसे मूलभूत अधिकार के लिए लड़ना कितना ज़रूरी है। उम्मीद है कि इस घटना के बाद, नगर निगम अपनी जल आपूर्ति प्रणाली को और बेहतर बनाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी नागरिक को गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर न होना पड़े।

क्या आपके शहर में भी कभी ऐसी कोई समस्या आई है? अपने अनुभव हमें कमेंट में बताएं।

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