inside story today

Header
collapse
...
Home / बुरहानपुर / बुरहानपुर मजदूर यूनियन का ऐतिहासिक प्रदर्शन: बहादरपुर सूत मिल के गेट पर निकली 'मजदूर की उम्मीदों की अर्थी'

बुरहानपुर मजदूर यूनियन का ऐतिहासिक प्रदर्शन: बहादरपुर सूत मिल के गेट पर निकली 'मजदूर की उम्मीदों की अर्थी'

2026-08-19  ZAFAR ALI  1 views

28 साल का लंबा इंतजार, अब तो जागो सरकार: ठाकुर प्रियांक सिंह

बुरहानपुर। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर जहाँ पूरी दुनिया मजदूरों के सम्मान का जश्न मना रही है, वहीं बुरहानपुर में एक हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला। बुरहानपुर मजदूर यूनियन के बैनर तले, यूनियन के अध्यक्ष प्रियांक सिंह के नेतृत्व में बहादरपुर सूत मिल के मुख्य गेट पर मजदूरों की 'उम्मीदों की अर्थी' निकाली गई। जवानी से बुढ़ापे तक का संघर्ष: उल्लेखनीय है कि बहादरपुर सूत मिल वर्ष 1998-99 में बंद कर दी गई थी। तब से लेकर आज 28 वर्षों बाद भी यहाँ के सैकड़ों मजदूरों को उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य फंड की बकाया राशि नहीं मिली है। प्रदर्शन के दौरान अध्यक्ष प्रियांश सिंह ने कहा, "यह अर्थी केवल एक प्रतीक नहीं है, बल्कि उन दर्जनों मजदूरों की आत्माओं की पुकार है जो अपना हक मांगे बिना ही गरीबी और बीमारी के कारण दुनिया से चले गए। शासन-प्रशासन की फाइलों में दबकर मजदूरों का भविष्य दम तोड़ चुका है।" हुकुमचंद मिल जैसा न्याय चाहिए: प्रेस को संबोधित करते हुए प्रियांश सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को घेरते हुए कहा कि जब इंदौर की हुकुमचंद मिल के मजदूरों को 224 करोड़ रुपये का भुगतान 'इंदौर मॉडल' के तहत किया जा सकता है, तो बुरहानपुर के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों? उन्होंने मांग की कि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तुरंत दखल दे और मिल की जमीन का निस्तारण कर मजदूरों के बकाया 56 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) का भुगतान करे। विनोद लौंढे ने कहा प्रशासन मजदूरों के अधिकारों को कुचल रहा है। आज का यह 'अर्थी प्रदर्शन' प्रशासन की संवेदनहीनता के विरुद्ध एक बिगुल है। उग्र आंदोलन की चेतावनी: प्रदर्शन के अंत में यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर बहादरपुर सूत मिल के मजदूरों के बकाये को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ, तो बुरहानपुर मजदूर यूनियन के कार्यकर्ता मजदूरों के साथ मिलकर राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस अवसर पर यूनियन के प्रमुख पदाधिकारी और भारी संख्या में पीड़ित मजदूर उपस्थित रहे, जिन्होंने 'मजदूर एकता जिंदाबाद' और 'हमारा हक हमें दो' के नारे लगाकर मिल परिसर को गुंजायमान कर दिया। इस अवसर पर मुकेश अरुण, श्रीराम मेढे, शेख सत्तार, शेख रहमान, कैलाश पहलवान, सैयद कादिर, केशव, तायड़े, विनोद लोंढे, मुकेश पवार आदि उपस्थित रहे।

Share: