बुरहानपुर (म.प्र.) – एक बेहद दर्दनाक हादसा सोमवार शाम को बुरहानपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के मोरदड़ गांव में हुआ, जहां नेशनल हाईवे निर्माण के प्लांट पर गिट्टी के डस्ट में दबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। यह हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
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मजदूर परिवार के थे बच्चे, खेलते-खेलते मौत के मुंह में समा गए
घटना सोमवार शाम करीब 6 बजे की है। बताया जा रहा है कि हाईवे निर्माण कार्य में लगे मजदूरों का परिवार झाबुआ से यहां काम करने आया था। मजदूर अपने-अपने काम में लगे थे, वहीं उनके छोटे-छोटे बच्चे प्लांट पर ही खेल रहे थे। खेलते-खेलते दो मासूम बच्चे गिट्टी डस्ट के ढेर के पास पहुंच गए, तभी एक डंपर वहां आया और उसी ढेर पर गिट्टी का डस्ट खाली कर दिया।
किसी को समझ ही नहीं आया कि बच्चे उस ढेर में दब गए हैं। कुछ देर तक बच्चों की खोजबीन होती रही, लेकिन जब बच्चे नहीं मिले तो परिजनों को चिंता हुई।
खिलौनों ने खोला हादसे का राज
जब बच्चों की तलाश की जा रही थी, तब डस्ट के ढेर के पास उनके खिलौने पड़े मिले। यहीं से परिजनों को शक हुआ कि कहीं बच्चे उसी डस्ट के नीचे तो नहीं दब गए। तुरंत जेसीबी मशीन मंगाई गई और डस्ट हटाया गया। जैसे ही खुदाई शुरू हुई, वहां दोनों बच्चों के शव दिखाई दिए। यह नज़ारा देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
किसकी लापरवाही से गई दो मासूम जानें?
घटना की जानकारी मिलने पर शाहपुर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि यह एक गंभीर हादसा है और डंपर चालक व प्लांट प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार दोपहर 12 बजे दोनों बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया।
परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
बच्चों के परिजनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्लांट पर सुरक्षा के कोई इंतज़ाम नहीं थे और बच्चों को वहां खेलने से रोकने वाला भी कोई नहीं था। अगर थोड़ी सी सतर्कता बरती जाती, तो ये दो मासूम जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
स्थानीय लोग बोले – यह हादसा नहीं, लापरवाही है
स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों का कहना है कि ऐसे निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते। डंपर चालकों को भी सावधानी नहीं सिखाई जाती और न ही कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेड्स लगाए जाते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मजदूरों के परिवारों की जान की कोई कीमत नहीं?